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| 「コーラン經」 壓伏品 第八十八 [アル・ガーシーヤ] 默伽 |
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| 「コーラン經」は日本初のコーラン全文翻訳本です |
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「コーラン經」は<譯者・坂本健一>{上下二巻}として世界聖典全集刊行會から(大正九年)発行されました |
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「コーラン經」の構成は凡例、目次、114品(章)の本文、附録として各品(章)の解題と註釋、イスラム教とコーランについての詳細な後書きから成っています。 |
| ここでは114品(章)別に本文と解題と註釋をまとめて紹介します |
| 本文の漢字・ルビ・送り仮名は大正時代そのままの形を復刻できるように努めました |
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| 壓伏品[アル・ガーシーヤ](1-26節)の本文 |
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大慈悲~の名に於て |
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一 壓伏(の日)の新聞爾曹に達せりや。 |
| 二 その日或ものは面を伏せ、 |
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三 勞働役作、 |
| 四 焦熱の火に投じ燒かれん、 |
| 五 熱湯の泉を飮まされん、 |
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六 荆棘の外に食なけん |
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七 そはふとらさずまた餓を醫せず。 |
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八 然るにその日他の者の面は喜び、 |
| 九 その(過去の)努力を以てスばれ、 |
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一〇 高き樂園に、 |
| 一一 毫も空談なく、 |
| 一二 其處にC流湧き、 |
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一三 其處に臥榻あり、 |
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一四 酒盞は前に、 |
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一五 衾は整ひ、 |
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一六 褥は布かる。 |
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一七 渠等駱駝を考へずや、その如何に創造られしかを、 |
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一八 天を、その如何に上げられしかを、 |
| 一九 山を、その如何に置かれしかを、 |
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二〇 地を、その如何に展かれしかを。 |
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二一 されば警戒めよ(爾の民を)、爾は唯警吿者なれば、 |
| 二二 爾は渠等の上に權威を行ふの力を授けられざれば。 |
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二三 背きて信ぜざる者をば |
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二四 ~は(來世の)大なる責罰を以て罰せん。 |
| 二五 洵にわれに渠等は歸せざるべからず、 |
| 二六 その時そをC算せんはわれに在り。 |
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| 壓伏品[アル・ガーシーヤ](1-26節)の解題(題名の由来、啓示時期、内容解説) |
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地獄の苦を說きて豫言者とそのヘとを崇尊せんとの意ならん。 |
| 宣傳第四年頃。 |
| 內容 審判の日と地獄の光景信徒の歡喜(一−一六)。 |
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麻訶末は唯警告し、處罰は~に在り(一七−二六)。 |
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| 壓伏品[アル・ガーシーヤ](1-26節)の註釋(文字の解釈) |
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一七 駱駝は亞剌比亞にては最重要なる動物なれば、之によりても~業の偉大を證するに足るなり。 |
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