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| 「コーラン經」 太白品 第八十六 [アル・タリク] 默伽 |
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| 「コーラン經」は日本初のコーラン全文翻訳本です |
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「コーラン經」は<譯者・坂本健一>{上下二巻}として世界聖典全集刊行會から(大正九年)発行されました |
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「コーラン經」の構成は凡例、目次、114品(章)の本文、附録として各品(章)の解題と註釋、イスラム教とコーランについての詳細な後書きから成っています。 |
| ここでは114品(章)別に本文と解題と註釋をまとめて紹介します |
| 本文の漢字・ルビ・送り仮名は大正時代そのままの形を復刻できるように努めました |
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| 太白品[アル・タリク](1-17節)の本文 |
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大慈悲~の名に於て |
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一 天と夜顯はるゝ所とによりて、 |
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二 夜顯はるゝ所の何たるかを爾曹に知らしむるは何ぞ。 |
| 三 そは光輝ける星なり。 |
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四 各の心靈には守護者あり。 |
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五 されば人をしてその何より創造られしかを考へしめよ。 |
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六 渠は迸る精より創造られき、 |
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七 腰る胸骨とより射出する。 |
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八 洵に~は復活を能くす、 |
| 九 あらゆる秘密の思想と行動の驗せらるる日、 |
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一〇 人は自衞りまた他を衞る力なき日。 |
| 一一 雨を降す天によりて、 |
| 一二 裂け(て物を生ず)る地によりて、 |
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一三 洵に是(善惡)識別の談義、 |
| 一四 輕浮の氣なし。 |
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一五 洵に(不信者はわが企圖を破らんと)謀れり。 |
| 一六 されどわれ亦(渠等の滅亡を)謀れり。 |
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一七 されば(噫、豫言者)不信者に忍べ、渠等を暫く放任せよ。 |
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| 太白品[アル・タリク](1-17節)の解題(題名の由来、啓示時期、内容解説) |
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一說に、アブ・タリブ Abu Talib 流星を見て恐れしとき此默示あり、始の三句はそれをいふ、故に流晶品と名づくとの說あり。 |
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されど他說にはアル・タリクは流星に非ずといふ。 |
| 此一卷は恐らく小品二篇を撮合せしものならむ。 |
| 前段は宣傳初期のもの、一一節以下は宣傳第四年頃のもの歟。 |
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內容 星の誓、各人には守護の天使あり、~は復活を善くし、審判の日は祕密悉く暴露す(一−一〇)。 |
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天地をかけて可蘭は~誥たる誓(一一−四)。 |
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麻訶末不信者の謀を忍ぶべき勸(一五−一七)。 |
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| 太白品[アル・タリク](1-17節)の註釋(文字の解釈) |
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三 星はアル・タリクal Tariq夜光星、則、太白金星、或はアル・ターキブal Thakib(土星)と爲し、或は狼星と爲す說あり。 |
| 七 男の腰、女の胸骨。 |
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